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डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को F-35 विमान खरीदने का प्रस्ताव दिया, भारत के पास हैं कई विकल्प

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को पांचवीं पीढ़ी के एडवांस लड़ाकू विमान एफ-35 अधिग्रहण का ऑफर दिया है। भारत को अमेरिका के अलावा रूस से भी SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट के ऑफर मिले हुए हैं। इसके अलावा भारत खुद का भी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बनाने के लिए AMCA प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।

 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट का ऑफर दिया है। हालांकि भारत पांचवीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट को खरीदेगा या नहीं, ये तय नहीं है, लेकिन पाकिस्तान डरा हुआ है। पाकिस्तान सरकार के अधिकारी से लेकर वहां के एक्सपर्ट्स और अब सेना के अधिकारी भी एफ-35 को लेकर अपना डर दिखा रहे हैं। अब पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल जाहिद महमूद (रिटायर्ड) ने अपना डर दिखाया है और कहा है कि अगर भारत एफ-35 लाइटनिंग II खरीदता है तो क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है, कि यह एडवांस 5th जेनरेशन फाइटर जेट क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को बदल सकता है। उन्होंने इस फाइटर जेट को पाकिस्तान के लिए खतरा बताया है।

पाकिस्तान के डरने की कई वजह है। सबसे बड़ी वजह तो यही है कि एफ-35 लाइटनिंग II दुनिया का सबसे एडवांस फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट है। चीन के दोनों फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान इसके सामने पानी भरते हैं। लेकिन पाकिस्तान के डरने की एक और बड़ी वजह है। दरअसल, पाकिस्तानी सेना ने पिछले साल जनवरी में चीनी फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान J-35 के अधिग्रहण की घोषणा की थी। पाकिस्तानी मीडिया ने पिछले साल दिसंबर में बताया है कि पाकिस्तान 40 J-35 फाइटर जेट खरीदने पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान की कोशिश ये थी कि चीनी लड़ाकू विमान से वो भारत के ऊपर रणनीतिक बढ़त बनाए।

पाकिस्तान के डरने की वजह समझिए
पाकिस्तान आर्थिक तौर पर कंगाल है। फिर भी वो चीनी लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा कर चुका है। माना जा रहा है कि चीन से लोन लेकर ही वो लड़ाकू विमान खरीदेगा। लेकिन अगर भारत एफ-35 खरीदता है तो वो भारत के खिलाफ रणनीतिक बढ़त हासिल नहीं कर पाएगा। यानि, करोड़ों डॉलर लगाकर एक तो वो चीनी लड़ाकू विमान खरीदेगा, फिर भी भारत को परेशान नहीं कर पाएगा, लिहाजा पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स अपने डर का इजहार कर रहे हैं। मेजर जनरल महमूद ने कहा है भारतीय वायु सेना के बेड़े में एफ-35 को शामिल करने से भारत को आक्रामक सैन्य अभियान चलाने की इजाजत मिल जाएगी, खास तौर पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) और गिलगित-बाल्टिस्तान (जीबी) जैसे क्षेत्रों में वो आक्रामक अभियान चला सकता है।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यह क्षमता भारत को रणनीतिक लाभ देगी, जिससे विवादास्पद सीमाओं पर तनाव बढ़ सकता है। मेजर जनरल महमूद ने पाकिस्तान को अपनी रणनीतिक और सामरिक नीतियों पर फिर से विचार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान वायु सेना को इस बात पर विचार करना होगा कि संभावित एफ-35 घुसपैठ का मुकाबला कैसे किया जाए या उसे कैसे रोका जाए।” इससे लिए उन्होंने पाकिस्तानी एयरफोर्स को चीन से एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वार फेयर के खिलाफ सिस्टम, और सहयोगी देशों से ए़डवांस फाइटर जेट की तत्काल खरीददारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि “F-35 में ऑपरेशन के लिए काफी गुप्त क्षमताएं हैं, जिससे भारत को पाकिस्तान की सीमा में हवाई हमले करने की ताकत मिल जाएगा। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान के अंदर खुफिया ऑपरेशन भी चला सकता है।”

चीन से फिफ्थ जेनरेशन जेट खरीदने वाला है पाकिस्तान
भारतीय एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत अगर अमेरिकी जेट खरीदता है तो पाकिस्तान फंस जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान ने चीनी फिफ्थ जेनरेशन जेट खरीदने की सिर्फ घोषणा की है, अभी तक उसने खरीदी नहीं है। 40 पांचवीं पीढ़ी के विमानों को खरीदने और उसके रखरखाव में जो खर्च आएगा, क्या पाकिस्तान उस खर्च को वहन कर पाएगा? इसके अलावा चीनी लड़ाकू विमान की क्षमता को लेकर कई सवाल भी उठे हैं और निश्चित तौर पर वो अमेरिकी जेट के मुकाबले कमजोर पड़ता है। यानि अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी पाकिस्तान के हाथ खाली ही रहेंगे।

पाकिस्तान इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड (IMF) के लोन पर चलने वाला देश है। लिहाजा अगर भारत F-35A खरीद लेता है तो पाकिस्तान बेचैन हो जाएगा। उसे हर हाल में चीनी फाइटर खरीदना होगा, भले ही उसके लिए अरबों डॉलर का और कर्ज लेना पड़ा। रणनीतिक लिहाज से भारत के लिए ये भी एक फायदे का ही सौदा होगा। इसके अलावा भारत AMCA कार्यक्रम भी चला रहा है। भारत इस प्रोजेक्ट के जरिए अपना फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान बना रहा है, जो करीब 10 सालों में ऑपरेशनल हो जाएगा। AMCA कार्यक्रम सुनिश्चित करता है कि भारत आत्मनिर्भर बना रहे। F-35A, AMCA और राफेल F4 का मिश्रण दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक पर भारत के प्रभुत्व को काफी ज्यादा मजबूत कर देगा।

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